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राजकीय महाविद्यालय लेंगडी गूलर, श्रावस्ती (उ० प्र०)

श्रावस्ती का संक्षिप्त परिचय

श्रावस्ती जनपद की स्थापना उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी द्वारा 3 मार्च 1997 को की गई थी। जनपद का मुख्यालय भिनगा है, जो श्रावस्ती से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्रावस्ती प्राचीन भारत ही नहीं, अपितु संपूर्ण विश्व में शिक्षा, सभ्यता एवं ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यह स्थल भगवान बुद्ध तथा भगवान महावीर की तपोस्थली एवं कर्मभूमि रहा है। भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के 25 वर्ष यहीं व्यतीत किए। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने भी यहाँ एक वर्ष का प्रवास किया। जैन तथा बौद्ध ग्रंथों में इस जनपद का नाम सावस्थी (श्रावस्ती) मिलता है। बुद्धकाल में यह जनपद कोशल महाजनपद की राजधानी था तथा उस समय के छह महानगरों में से एक था। यह नगर अत्यंत समृद्ध एवं वैभवशाली था। प्राचीन काल में संपूर्ण विश्व को ज्ञान एवं धर्म की ज्योति से आलोकित करने वाले इस जनपद की गणना वर्तमान में शिक्षा, साक्षरता एवं विकास के मानकों पर उत्तर प्रदेश के अपेक्षाकृत पिछड़े जनपदों में की जाती है।

महाविद्यालय का संक्षिप्त परिचय

जनपद में उच्च शिक्षा की स्थिति को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय मॉडल महाविद्यालय, श्रावस्ती की स्थापना की गई। इस महाविद्यालय का डिजिटल उद्घाटन 03 फरवरी 2019 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी द्वारा किया गया। यह महाविद्यालय भिनगा–इकौना मुख्य मार्ग से लगभग 02 किलोमीटर की दूरी पर ग्रामीण अंचल में स्थित है। यह भिनगा से 28 किलोमीटर तथा श्रावस्ती से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा मिशन (RUSA) के अंतर्गत स्थापित यह महाविद्यालय प्रारंभ में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर से सम्बद्ध था। वर्तमान में यह महाविद्यालय माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर से सम्बद्ध है। महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय की कक्षाएँ शैक्षणिक सत्र 2019 से संचालित की जा रही हैं। परिसर में आधुनिक प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय, कंप्यूटर कक्ष, खेल मैदान एवं छात्र–छात्रा छात्रावास जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

महाविद्यालय अपने ध्येय वाक्य “विद्या योगेन रक्ष्यते” के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्रदान करने हेतु निरंतर संकल्पित है।

— प्राचार्य